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Juloos Ki Bheed Bhavtosh Pandey
Juloos Ki Bheed
Bhavtosh Pandey
आज हम सà¤à¥€ जाने-अनजाने में à¤à¤• 'जà¥à¤²à¥‚स की à¤à¥€à¥œ' का हिसà¥à¤¸à¤¾ बनते जा रहे हैं - लोग बदलते जा रहे हैं और कई बार उस à¤à¥€à¥œ का नायक à¤à¥€ लेकिन जà¥à¤²à¥‚स जà¥à¤¯à¥‹à¤‚ का तà¥à¤¯à¥‹à¤‚ आगे बॠरहा है -इस कथा संकलन में कहानियों के विषयों में काफी विविधता है - इनके नायक 'सà¥à¤ªà¤°à¤®à¥ˆà¤¨' न होकर à¤à¤• आम जन है जो आप और हममें से कोई à¤à¤• है - घटनाà¤à¤‚ और परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ बिलà¥à¤•à¥à¤² परिचित हैं जिसका आज का मधà¥à¤¯à¤® और गरीब तबका रोज सामना कर रहा है - उमà¥à¤®à¥€à¤¦ है कि पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• पाठक किसी न किसी कहानी के चरितà¥à¤° में अपने आप को पाà¤à¤—ा -
| Mediji | Grāmatas Paperback Book (Grāmata ar mīksto vāku un līmēto muguru) |
| Izlaists | 2019. gada 28. jūnijs |
| ISBN13 | 9781645873204 |
| Izdevēji | Notion Press |
| Lapas | 154 |
| Izmēri | 140 × 216 × 9 mm · 204 g |
| Valoda | Hindi |
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